Swami Vivekananda Sardh Shati Samaroh with a theme of Wake Up Bharat! Enlighten The World!!. www.vivekananda150jayanti.org
Wednesday, May 29, 2013
Monday, May 27, 2013
National Security
“India should deal firmly with China “ says Shri Ram Madhav
The program was organized as part of a monthly
seminar series of Chetana Sravanthi. Dr.K.Krishna Reddy, Secretary, SVS
medical Educational Society, was the chief guest and spoke in length
about the life and message of Swami Vivekananda and the relevance of
Swamiji’s thoughts in present context. V.Surender Reddy, President
Chetana Sravanthi, and N. Chandrasekhar, President, Swami Vivekananda
150th Jayanthi Utsava Samithi were also present on the
occasion. More than 400 people turned up at the program and felt
enlightened with the message and information provided by the speakers.
Thursday, May 23, 2013
SVSSS Organizes NRPDC - Itanagar
Participants are motivate & inspired To lead on future with a positive direction and to inculcate patriotism, cultural value, self discipline and the attitude of Social Service, with the twin ideal of Vivekananda Kendra “Man Making - Nation Building” through the various sessions on yoga, patriotic songs, concentration & memory development games, storytelling like of patriotic personality.
VIVEKANAND VICHAR MANCH (KAITHAL)
VIVEKANAND VICHAR MANCH(KAITHAL)
To Celebrate Vivekananda ShardShati Varsh
In the weekly meeting of VVM
which is a branch of RSS that works among the college vidyarthis ,after
Discussion Have Conclude the following programs:-
1. Vivekananda Pustakalay
Set up of New Library in hostel of HCTM on 9th May 2013 on the occasion of Maharana Partap Jayanti & First struggle of Independence on 10th
May 1857, After doing the full preparation for the inauguration of the
Library, We invited The Director of the College for the inauguration
where congratulated for this noble work and assured for fulfilling any
future need regarding this. In the Library there is a collection of
books related to biographies of Indian revolutionaries of Indian
Freedom Struggle, Cultural Heritage, Bharatiya Itihas. For the
purchasing of the books we all collected the amount from the VVM members
and the total cost till now on the purchase is Rs. 10000. Maintenance
of the library is also being done by the members of the VVM. Besides the
books there are magazines and newspapers on daily run.
2. Vivekananda Naatika Manch
3. Vivekananda Adhyaan Manch: For Helping the unprivileged students in studies in nearby areas.
The above 2 & 3 are going to start soon.
Beside all these weekly meeting and weekly shakha is also going on.
Monday, May 20, 2013
Parbhudh Mahila Goshthi - Gurgaon Haryana
Parbhudh Mahila Goshthi - Gurgaon Haryana
प्रेस विज्ञप्ति (१७ /० ५ /२ ० १ ३ )
मर्यादा
और संस्कारो से सुशोभित नारी निभा सकती है राष्ट्र निर्माणमें अहम भूमिका -
भारती अरोड़ा गुडगाव - स्वामी विवेकनन्द सार्धशती आयोजन समिति की और से
"राष्ट्र निर्माणमें हमारी भूमिका" विषय पर प्रबुद्ध महिला गोष्ठी का आयोजन
किया गया जिसमे मुख्य अतिथि डीसीपी ट्रैफिक भारती अरोड़ा ने हिस्सा लिया।
मुख्य वकता प्रख्यात साहित्यकार मृदुला सिन्हा रही तथा अध्यक्षता डॉ.
चंद्रकांता ने की।
स्वामी
विवेकानंद सार्धशती आयोजन समिति गुरुग्राम की संवर्धिनी आयाम द्वारा
सेक्टर १ ४ स्थित राजकीय महाविद्यालयमें "राष्ट्र निर्माण में हमारी
भूमिका" विषय पर प्रबुद्ध महिला गोष्ठी का आयोजन किया गया । जिसमे गुडगाव
की विभिन्न क्षेत्रो से जुडी सेकड़ो प्रबुद्ध महिलाओ ने हिस्सा लिया ।
गोष्ठी में मुख्य अतिथि डीसीपी ट्रैफिक भारती अरोड़ा ने कहा कि मर्यादा और
संस्कारों से सुशोभित नारी एक सफल राष्ट्र के निर्मानमें अहम भूमिका नीभा
सकती है। वर्त्तमान में करोडो महिलाए राष्ट्र की प्रगति में पुरुषो के साथ
कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में अपना मुकाम ऊँचा किये हुये है। दामिनी
और गुडिया जैसे ज्वलंत प्रकरण पर कानून व्यवस्था को और कडा और तीखा बनाये
जानेकी जनता की मांग का समर्थन देते हुये उन्होंने कहा की इस दिशामे कड़े
क़ानून बनाकर इन घटनाओ पर रोक लगायी जा सकती है। भारती अरोड़ा ने महिलाओ और
छात्राओं से हर अन्याय और उत्पीडन के खिलाफ आवाज़ उठाने का आहवान करते हुये
कहा की अन्याय - उत्पीडन की इस लड़ाई में क़ानून व्यवस्था के साथ वह हर संभव
उनके साथ है।
मुख्य
वकता साहित्यकार मृदुला सिन्हा ने कहा कि नारी परिवार की धुरी है और
परिवार, समाज और देश की धुरी है।इस कारण देश के निर्माणमे नारी की
महत्वपूर्ण भूमिका बनती है। नारी घरमे हो या घर के बाहर, जहाँ भी है वह
डटकर अपने कर्त्तव्य और अधिकारों के लिए खड़ी है। अधक्षीय भाषण में डॉ.
चंद्रकांता ने कहा की भारतीय संस्कार देश की प्रत्येक समस्या का समाधान कर
सकते है और संस्कार जागरण का महत्वपूर्ण दायित्व नारी के कंधो पर ही है।
मचासिन विशिष्ट अतिथि डॉ. पदमेश बवेजा ने विवेकानंद सार्धशती आयोजन समिति
के संवर्धिनी आयाम की भूमिका पर प्रकाश डाला। दिल्ली से पधारी डॉ. नीशा
भार्गव ने कविता के माध्यम से नारी की भूमिका को चित्रित किया। विणा गोरई
ने अपने गीत के माध्यम से स्वामी विवेकानंद जी को भावांजलि प्रस्तुत की।
गोष्ठी
का मंच संचालन संवर्धिनी आयाम की जिला संयोजिका डॉ. नलिनी भार्गव ने किया।
गोष्ठी के इस सफल आयोजन में डॉ. नलिनी भार्गव, गार्गी कक्कड़, वीणा
अग्रवाल, वीणा गोरई, डॉ. इंदु बोकन, सुरेश शर्मा, सविता स्याल, डॉ. सविता
उपाध्याय, आभा कुलश्रेष्ठ, उषा महेता, परिणीता फुटेला तथा आयोजन समिति के
जिला संयोजक कैलाश गर्ग, प्रांतीय सदस्य - अजय सिंहल, सह संयोजक - ओकार सिह
पाल, मिडिया प्रभारी राजीव मित्तल तथा डॉ. अशोक दिवाकर एवं नरेन्द्र गौड़
सहित सेकड़ो प्रबुद्ध महिला एवं नागरिक उपस्थित थे।
राजीव मित्तल
जिला मिडिया प्रभारी
स्वामी विवेकानंद सर्धशाती आयोजन समिति
गुरुग्राम
मोबाईल : ९ ९ १ ० १ ६ ९ ७ ९ ०
Thursday, May 16, 2013
Personality Development Camp
व्यक्तित्व विकास शिविर : मंदसौर
विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, शाखा मंदसौर एवं स्वामी विवेकानन्द सार्धशती समारोह समिति के संयुक्त तत्वाधान में चल रहे पांच दिवसीय शिविर में किशोर आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं को संबोधित करते हुए जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री व्यास ने कहा कि तरूणाई का वेग स्वयं को, परिवार तथा समाज को संभालना, सहेजना और सही दिशा प्रदान करने का होना चाहिये अन्यथा चट प्रचण्ड बन कर तटबंध तोड़ सकती है। हमारा देश युवा शक्ति बन कर उभर रहा है इस शक्ति को स्वामी विवेकानन्द के विचारों, संदेशों के माध्यम से सृजनात्मक विकास में बदला जा सकता है। श्री व्यास ने बच्चों से कहा कि उनके साथ कुछ भी अनुचित, अमानवीय, अभद्र होता है तो संकोच न करे प्रतिरोध करे, इसकी सूचना और शिकायत माता-पिता, अभिभावक, पुलिस से करे। पुलिस आपकी मदद के लिये है। आपने न्यायालय के कई निर्णयों की सरल व्याख्या करते हुए बच्चों को समझाया। अनिवार्य शिक्षा, मौलिक अधिकार, बिना लायसेंस वाहन न चलाने जैसी समझाईश भी दी। आपने बच्चों से संवेदनशील बनकर अच्छे विचारों को अपनाने, दूसरों की मदद करने, साहस और संकल्प से कार्य करने का आव्हान किया।
इसके पूर्व श्री व्यास एवं आदित्य धनोतिया ने दीप प्रज्वलित कर सत्र का
शुभारंभ किया। इस अवसर पर सहायक लोक अभियोजक नीतेश कृष्णन, सुखराम गरवाल,
सुनील परमार, रमेश डामर, नरेन्द्रसिंह सिपानी, ज्योति यजुर्वेदी, शंभुसेन
राठौर, साधना सेठी, प्रीती अजमेरा, रामप्रसाद धनगर, नरेन्द्र कुमार, प्रमोद
वर्मा, श्रीपाल मालवीय, श्वेता गंगवाल, दीपेश भागवत, सुनील पहाडि़या सहित
बड़ी संख्या में बच्चों, अभिभावक एवं गणमान्य जन उपस्थित थे। शिविर के सत्र
का संचालन डाॅ. घनश्याम बटवाल ने किया। अतिथियों को श्रीफल एवं विवेकानन्द
साहित्य शिक्षाविद् श्री एम.एल. गुप्ता एवं श्री राजेश मेड़तवाल ने भेंट
किये। आभार माना विवेकानन्द केन्द्र मार्गदर्शक श्री नरेन्द्रसिंह सिपानी
ने। सत्र समापन पर प्रोजेक्टर के माध्यम से ओलम्पिक खेल विजेता खिलाडि़यों
की झलक डाक्युमेन्ट्री प्रदर्शित की गई जिसे सभी ने सराहा। यह जानकारी
विवेकानन्द केन्द्र एवं सार्ध शती समारोह समिति प्रचार प्रमुख पत्रकार श्री
प्रहलाद शर्मा ने दी।
Wednesday, May 15, 2013
“विवेकानन्द और भारत” गोष्ठी : रांची
“विवेकानन्द और भारत” गोष्ठी : रांची
इस कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं स्वामी विवेकानन्द जी के चित्र पर पुष्पार्पण कर दीप प्रज्ज्जवलन के साथ सम्मानित अतिथियों को श्रीफल प्रदान कर किया गया।
सैंकड़ो गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में मुख्य वक्ता श्री इन्द्रेश कुमार ने कहा कि .ष्स्वामी विवेकानन्द जी का प्रादुर्भाव ऐसे समय में हुआ था जब भारत अंधकारमय काल से गुजर रहा था। उन्होने रामकृष्ण परमहंस के प्रभाव से देश की मुर्छा को तोड़ी। विवेकानन्द जी लगभग पांच वर्षो तक पराधीन भारत का भ्रमण कर भारत के दुःखदर्द को जाना। महज साढ़े उन्तालिस वर्ष की अल्पायु में उन्होने भारत के आत्मस्वाभिमान को जगायाए मरणासन्न हिन्दु समाज में प्राण फुंकने का प्रयास कियाए भारत ही नही ब्लकि देष देषान्तर में हिन्दु संस्कार और संस्कृतिए ज्ञान और विज्ञान का डंका बजाया। पराधीन भारतीयों को जीने की कला और स्वाभिमान तथा साहस दिया। उन्होने कर्म की प्रेरणा देकर एकबार फिर सुसुप्त हिन्दु समाज को झकझोरने का प्रयास किया था। आज के संदर्भ में विवेकानन्द के कार्यों का उल्लेख करते हुए श्री कुमार ने कहा कि आज भारतीय समाज बीमार हैए साधन हैए सम्पन्नता हैए प्रगति . वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है। किन्तु जो मानव में होना चाहिए जैसे. न हममें नैतिक तेज हैए न हमारा मूल्य हैए दिशाहीन समाज है और भ्रष्टाचार में डूबी राजनीति है। वास्तव में आधुनिकता के इस दौर में हमने हिन्दू सामाजिक मूल्यों का दफन कर रखा है जो इस देश को संक्रमण काल में डाले हुए है। आज भारत को फिर विवेकानन्द का वह तेजए वह शौर्य और वह संकल्प ही भारत को पुर्नवैभव पर पुर्नस्थापित करवा सकता है। भारत की आजादी की लड़ाई में गांधी जी से लेकर जितने बड़े नेता हुएए जिन्होंने देश को सबकुछ मानाए उनके पिछे विवेकानन्द की प्रेरणा थी। कोई साधन नहींए कोई सुविधा नहींए किन्तु एक महान संकल्प थाए जो विवेकानन्द के तेज से दिगदिगंत तक गुंजा। विवेकानन्द ने कहा था जब तक करोड़ों भूखेए अशिक्षित रहेंगेए तब तक मैं उस प्रत्येक आदमी को विश्वासघातक समझूंगाए जो उनके खर्च पर शिक्षित हुआ हैए किन्तु उन पर ध्यान नहीं देता। ऐसे महान सांस्कृतिक राष्ट्रीयता के जनक स्वामी विवेकानन्द अपने अल्पायु में ही जो कर दिखायाए वह कोई हजारों वर्षों में भी कोई अकेले नहीं कर सकता।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व न्यायाधीश श्री विक्रमादित्य प्रसाद ने स्वामी विवेकानन्दजी जीवन आदर्शो पर प्रकाश डालते हुए लोगों का आह्वान किया कि देश के विकास में स्वामी विवेकानन्दजी आज भी उतने हीं प्रासंगिक हैं । धन्यवाद ज्ञापन श्री हिमांशुकुमार वर्मा ने किया।
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