राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के प्रथम चरण में नगर व् खंड स्तर पर क्विज शुरू। जिला स्तर पर २१ जुलाई व् प्रान्त स्तर पर २८ जुलाई को प्रतियोगिता होगी, जिला स्तर की विजयी टीम अक्टूबर में कन्याकुमारी स्मारक दर्शन के लिए आएगी
Swami Vivekananda Sardh Shati Samaroh with a theme of Wake Up Bharat! Enlighten The World!!. www.vivekananda150jayanti.org
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Thursday, July 18, 2013
Monday, July 15, 2013
Kahani Kaho Pratiyogita : Indore
कहानी कहो प्रतियोगिता : इन्दौर
Thursday, June 20, 2013
Wednesday, June 12, 2013
News Vivekanand 7-6-2013 : Bhartiya Shiksha
षिक्षा को भारतीय बनाने की आवष्यकता है
षिक्षा के मूल घटको पर हो दीर्घकालिक षिक्षा योजना
षिक्षा में योग्य परिवर्तन के लिए विद्वानेां षासन और व्यापक जनसमर्थन की आवष्यकता है। शासन को संरक्षक की भूमिका में आना होगा। भारत के पास हजारेां वर्षों का इतिहास है जो प्रगति भारत ने की थी वह बेजोड़, सर्वश्रेष्ठ है। आज वर्तमान समाज और समाज व्यवस्थाओं में बहुत बड़े प्रमाण में पाष्चात्य का अनुकरण हो रहा है इसमें मुख्य भूमिका षिक्षा की है। षिक्षा पूरी तरह से पाष्चात्य से प्रभावित है। उपरोक्त विचार विवेकानंद सार्धषती पर डाॅ. हेडगेवार स्मारक समिति द्वारा आयेाजित तीन दिवसीय व्याख्यान माला कि द्वितीय दिवस पर बोलते हुए दिलीपजी केलकर ने अपने उद्बोधन में में कही। आपने कहा कि हमारे देष में हजारेां वर्षों से स्वाभाविक समाज रहा है उसका अपना अर्थषास्त्र, समाजषास्त्र, न्यायषास्त्र रहा है। हमारे देष की षिक्षा का आधार यही रहा है। आपकी षिक्षा में अर्थषास्त्र हम एड्म स्मिथ की पढ़ते हैं तो समाजषास्त्र के एरिस्टोटल इसके दुष्परिणाम भारत सहित पूरे विष्व में दिखाई दे रहे हैं। आत्मविनाष की प्रवृत्ति में तेजी से वृद्धि हो रही है। भारत के हजारों वर्षो के उपलब्ध इतिहास से समाज में पर्यावरण और षिक्षा की कभी समस्या नहीं हुई। सारी समस्याओं का आगमन अंग्रेजी षिक्षापद्धति से हुआ है। षिक्षा को भारतीय बनाने की आवष्यकता है। इसके प्रयास स्वतंत्रता पूर्व अरविन्द, लाजपतराय, तिलक, गांधी सभी ने किए वर्तमान में भी रामकृष्ण मिषन, चिन्मय मिषन, श्री श्री रविषंकर, श्री रामदेव द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। सबसे बड़ा प्रयास विद्याभारती का है जो 25 हजारसे अधिक विद्यालयों में षिक्षा दे रहे हैं। उसके परिणाम तो हैं परंतु अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं। यह सब व्यर्थ हो रहा है ऐसी नही ंहै कमी षिक्षा की मूलधारा मे ंहै। केलकरजी के मूलधारा के चार घटक बताए षिक्षा का लक्ष्य, षिक्षा पद्धति, पाठ्यक्रम और षिक्षक की गुणवत्ता उन्होंने कहा चारों घटक आज पाष्चात्य से प्रभावित है। स्वामी विवेकानंद ने षिक्षा के लक्ष्य देा सूत्र दिए हैं पहला ‘‘षिक्षा अन्र्तनिहित पूर्णत्व के विकास की प्रक्रिया है’’ और दूसरा षिक्षा राष्ट्र का निर्माण करने वाली होनी चाहिए। अध्यापन पद्धति लक्ष्य की ओर ले जाने वाली होना चाहिए जिसमें जन्मपूर्व से मृत्यु पर्यन्त तक की षिक्षा का विचार होना चाहिए। आज वे सब नष्ट हो गई हैं उन्हें पुर्नजीवित करना होगा। पाठ्यक्रम समाज और सृष्टि कि साथ एकात्मता की भावना के विकास के आधार पर ही होना चाहिए और षिक्षा के लक्ष्येां के आधार पर राष्ट्रीयता का विकास पूर्णता का विकास होना चाहिए। उन्होंने कहा षिक्षक अपने ज्ञान के प्रति निष्ठ होना चाहिए वह ज्ञान निष्ठ, राष्ट्रनिष्ठ, समाजनिष्ठ, विद्यार्थीनिष्ठ हो, वह विद्यार्थी को विकास की मर्यादा तक ले जाने वाला हो। वह कुषल निर्भय, आत्मविष्वास से युक्त समाज निर्माता है। इन सभी का निर्माण कैसे हो इसके लिए दीर्घावधि की व्यापक योजना बनाना होगी इस येाजना में संगठित प्रयासों की आवष्यकता होगी। इस दीर्घकालीन योजना के पांच चरण (तप) है जिसमें हर चरण 12 वर्ष का होगा।
1. नेमीषारण्य - इस योजना में देष भर के विद्वान उपयुक्त चार क्षेत्रों में अध्ययन और षिक्षा के श्रेष्ठ मूल तत्वों प्राचीन और वर्तमान षिक्षा पद्धति के साथ मेल बिठाकर उसे पुनः प्रस्तुत करें।
2. लोकमत परिष्कार - उपरोक्त अध्ययन और अनुसंधान से जो निष्कर्ष निकल कर आयेगा उसे समाज तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इसमें होगी।
3. परिवार कुटुम्ब का सुदृढ़ीकरण - परिवार को संस्कारित होना बहुत आवष्यक है। जब तक संस्कारवान विद्यार्थी विद्यालय नहीं आयेेगे तब तक षिक्षक बहुत ज्यादा योगदान नहीं दे पायेगा।
4. आचार्य निर्माण और षिक्षक के द्वारा स्वयं षिक्षा केन्द्रों का निर्माण।
ये सभी कार्य 3 जुलाई 2012 से विषुद्ध भारतीयता पर आधारित पुनरूत्थान विद्यापीठ अहमदाबाद में चालू हो चुका है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अध्यक्षता कर रहे षिक्षाविद श्रीमान माधव परंाजपे, ने भी संबोधित किया। संचालन सागर चैकसेे ने किया।
8 जून के कार्यक्रम - श्री बजरंगलालजी गुप्त का व्याख्यान विषय ‘‘विवेकानंद के विचारों के आलोक में स्वाभिमानी भारत’’ इसे आर्थिक जगत के विद्वानेां, व्यवसाईयों के बीच रखा जायेगा।
श्रीमान संपादक महोदय भवदीय
दैनिक ....................................
की ओर सादर प्रकाषनार्थ प्रेषित। नितिन तापडि़या
प्रांत प्रचार प्रमुख
षिक्षा के मूल घटको पर हो दीर्घकालिक षिक्षा योजना
षिक्षा में योग्य परिवर्तन के लिए विद्वानेां षासन और व्यापक जनसमर्थन की आवष्यकता है। शासन को संरक्षक की भूमिका में आना होगा। भारत के पास हजारेां वर्षों का इतिहास है जो प्रगति भारत ने की थी वह बेजोड़, सर्वश्रेष्ठ है। आज वर्तमान समाज और समाज व्यवस्थाओं में बहुत बड़े प्रमाण में पाष्चात्य का अनुकरण हो रहा है इसमें मुख्य भूमिका षिक्षा की है। षिक्षा पूरी तरह से पाष्चात्य से प्रभावित है। उपरोक्त विचार विवेकानंद सार्धषती पर डाॅ. हेडगेवार स्मारक समिति द्वारा आयेाजित तीन दिवसीय व्याख्यान माला कि द्वितीय दिवस पर बोलते हुए दिलीपजी केलकर ने अपने उद्बोधन में में कही। आपने कहा कि हमारे देष में हजारेां वर्षों से स्वाभाविक समाज रहा है उसका अपना अर्थषास्त्र, समाजषास्त्र, न्यायषास्त्र रहा है। हमारे देष की षिक्षा का आधार यही रहा है। आपकी षिक्षा में अर्थषास्त्र हम एड्म स्मिथ की पढ़ते हैं तो समाजषास्त्र के एरिस्टोटल इसके दुष्परिणाम भारत सहित पूरे विष्व में दिखाई दे रहे हैं। आत्मविनाष की प्रवृत्ति में तेजी से वृद्धि हो रही है। भारत के हजारों वर्षो के उपलब्ध इतिहास से समाज में पर्यावरण और षिक्षा की कभी समस्या नहीं हुई। सारी समस्याओं का आगमन अंग्रेजी षिक्षापद्धति से हुआ है। षिक्षा को भारतीय बनाने की आवष्यकता है। इसके प्रयास स्वतंत्रता पूर्व अरविन्द, लाजपतराय, तिलक, गांधी सभी ने किए वर्तमान में भी रामकृष्ण मिषन, चिन्मय मिषन, श्री श्री रविषंकर, श्री रामदेव द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। सबसे बड़ा प्रयास विद्याभारती का है जो 25 हजारसे अधिक विद्यालयों में षिक्षा दे रहे हैं। उसके परिणाम तो हैं परंतु अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं। यह सब व्यर्थ हो रहा है ऐसी नही ंहै कमी षिक्षा की मूलधारा मे ंहै। केलकरजी के मूलधारा के चार घटक बताए षिक्षा का लक्ष्य, षिक्षा पद्धति, पाठ्यक्रम और षिक्षक की गुणवत्ता उन्होंने कहा चारों घटक आज पाष्चात्य से प्रभावित है। स्वामी विवेकानंद ने षिक्षा के लक्ष्य देा सूत्र दिए हैं पहला ‘‘षिक्षा अन्र्तनिहित पूर्णत्व के विकास की प्रक्रिया है’’ और दूसरा षिक्षा राष्ट्र का निर्माण करने वाली होनी चाहिए। अध्यापन पद्धति लक्ष्य की ओर ले जाने वाली होना चाहिए जिसमें जन्मपूर्व से मृत्यु पर्यन्त तक की षिक्षा का विचार होना चाहिए। आज वे सब नष्ट हो गई हैं उन्हें पुर्नजीवित करना होगा। पाठ्यक्रम समाज और सृष्टि कि साथ एकात्मता की भावना के विकास के आधार पर ही होना चाहिए और षिक्षा के लक्ष्येां के आधार पर राष्ट्रीयता का विकास पूर्णता का विकास होना चाहिए। उन्होंने कहा षिक्षक अपने ज्ञान के प्रति निष्ठ होना चाहिए वह ज्ञान निष्ठ, राष्ट्रनिष्ठ, समाजनिष्ठ, विद्यार्थीनिष्ठ हो, वह विद्यार्थी को विकास की मर्यादा तक ले जाने वाला हो। वह कुषल निर्भय, आत्मविष्वास से युक्त समाज निर्माता है। इन सभी का निर्माण कैसे हो इसके लिए दीर्घावधि की व्यापक योजना बनाना होगी इस येाजना में संगठित प्रयासों की आवष्यकता होगी। इस दीर्घकालीन योजना के पांच चरण (तप) है जिसमें हर चरण 12 वर्ष का होगा।
1. नेमीषारण्य - इस योजना में देष भर के विद्वान उपयुक्त चार क्षेत्रों में अध्ययन और षिक्षा के श्रेष्ठ मूल तत्वों प्राचीन और वर्तमान षिक्षा पद्धति के साथ मेल बिठाकर उसे पुनः प्रस्तुत करें।
2. लोकमत परिष्कार - उपरोक्त अध्ययन और अनुसंधान से जो निष्कर्ष निकल कर आयेगा उसे समाज तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इसमें होगी।
3. परिवार कुटुम्ब का सुदृढ़ीकरण - परिवार को संस्कारित होना बहुत आवष्यक है। जब तक संस्कारवान विद्यार्थी विद्यालय नहीं आयेेगे तब तक षिक्षक बहुत ज्यादा योगदान नहीं दे पायेगा।
4. आचार्य निर्माण और षिक्षक के द्वारा स्वयं षिक्षा केन्द्रों का निर्माण।
ये सभी कार्य 3 जुलाई 2012 से विषुद्ध भारतीयता पर आधारित पुनरूत्थान विद्यापीठ अहमदाबाद में चालू हो चुका है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अध्यक्षता कर रहे षिक्षाविद श्रीमान माधव परंाजपे, ने भी संबोधित किया। संचालन सागर चैकसेे ने किया।
8 जून के कार्यक्रम - श्री बजरंगलालजी गुप्त का व्याख्यान विषय ‘‘विवेकानंद के विचारों के आलोक में स्वाभिमानी भारत’’ इसे आर्थिक जगत के विद्वानेां, व्यवसाईयों के बीच रखा जायेगा।
श्रीमान संपादक महोदय भवदीय
दैनिक ....................................
की ओर सादर प्रकाषनार्थ प्रेषित। नितिन तापडि़या
प्रांत प्रचार प्रमुख
Name of Road on Swami Vivekananda in Faridabad
दिनांक : 02-06-2013
प्रेस विज्ञप्ति
जीवन का सार अनोखा है ,
मृत्यु का श्रृंगार अनोखा है ,
संत तो बहुत हैं इस दुनिया में ,
परन्तु विवेकानंद का भाव अनोखा है । -डा. मार्कंडेय आहूजा
संत तो बहुत हैं इस दुनिया में ,
परन्तु विवेकानंद का भाव अनोखा है । -डा. मार्कंडेय आहूजा
उन्होंने कहा कि यदि हम सभी स्वामी जी के विचारों को जीवन में अपनाकर देश को भौतिकता से आध्यात्मिकता की ओर लेकर चलें तो हम अपने देश की दशा और दिशा ही बदल सकते हैं । क्योंकि विवेकानंद जी के जीवन दर्शन में सम्पूर्ण भारत निहित है । जाति एवं वर्ण व्यवस्था से परे भारत कल्याण व विश्व कल्याण ही स्वामी जी का स्वप्न था । गुलामी के काल में हमारे देश की प्राचीन सभ्यता व संस्कृति को नष्ट-भ्रष्ट कर देश की जड़ों को ही काटने का काम किया गया था । परन्तु अब हमें अपनी सभी सुप्त शक्तियों को जाग्रत कर अपने देश और समाज के लिए एक साथ मिलकर काम करना होगा ।
इससे पूर्व कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए समिति के प्रांत संयोजक श्री अनिल कुमार ने बताया कि स्वामी विवेकानंद जी के सार्ध शती वर्ष में स्वामी जी के जीवन का सन्देश जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जायेगा और देश की युवा शक्ति को स्वामी जी के सपनों का भारत निर्माण करने के लिए प्रेरित किया जाएगा ।
विवेक संगोष्ठी से पूर्व सेक्टर 9-10 की डिवाइडिंग रोड का नाम फरीदाबाद नगर निगम की अनुमति से स्वामी विवेकानंद मार्ग डा . मार्कंडेय जी के कर-कमलों द्वारा रखा गया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अग्रवाल कोलेज बल्लबगढ़ के प्रिंसिपल डा. के. के. अग्रवाल ने समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचारों का प्रचार-प्रसार कर देश की युवा शक्ति को जाग्रत करना आज बहुत ही आवश्यक है ।
इस अवसर पर विशिष्ट अथिति के रूप में
पार्षद श्रीमती द्रौपदी अद्लक्खा सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला
संघचालक श्री अजित सिंह जैन, समिति के विभाग संयोजक दीपक अग्रवाल जी, जिला
संयोजक सुधीर कपूर जी , सह-जिला संयोजक बी. आर. सिंगला जी, भाजपा नेता धनेश अद्लक्खा , समिति के अनेक कार्यकर्ता व शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे ।
मंच का संचालन समिति के विभाग पालक श्री गंगाशंकर मिश्र ने किया ।
मंच का संचालन समिति के विभाग पालक श्री गंगाशंकर मिश्र ने किया ।
-राजेंद्र प्रसाद गोयल, एडवोकेट
मीडिया प्रमुख,
स्वामी विवेकानंद सार्ध शती समारोह समिति,
मीडिया प्रमुख,
स्वामी विवेकानंद सार्ध शती समारोह समिति,
Thursday, May 23, 2013
SVSSS Organizes NRPDC - Itanagar
Participants are motivate & inspired To lead on future with a positive direction and to inculcate patriotism, cultural value, self discipline and the attitude of Social Service, with the twin ideal of Vivekananda Kendra “Man Making - Nation Building” through the various sessions on yoga, patriotic songs, concentration & memory development games, storytelling like of patriotic personality.
VIVEKANAND VICHAR MANCH (KAITHAL)
VIVEKANAND VICHAR MANCH(KAITHAL)
To Celebrate Vivekananda ShardShati Varsh
In the weekly meeting of VVM
which is a branch of RSS that works among the college vidyarthis ,after
Discussion Have Conclude the following programs:-
1. Vivekananda Pustakalay
Set up of New Library in hostel of HCTM on 9th May 2013 on the occasion of Maharana Partap Jayanti & First struggle of Independence on 10th
May 1857, After doing the full preparation for the inauguration of the
Library, We invited The Director of the College for the inauguration
where congratulated for this noble work and assured for fulfilling any
future need regarding this. In the Library there is a collection of
books related to biographies of Indian revolutionaries of Indian
Freedom Struggle, Cultural Heritage, Bharatiya Itihas. For the
purchasing of the books we all collected the amount from the VVM members
and the total cost till now on the purchase is Rs. 10000. Maintenance
of the library is also being done by the members of the VVM. Besides the
books there are magazines and newspapers on daily run.
2. Vivekananda Naatika Manch
3. Vivekananda Adhyaan Manch: For Helping the unprivileged students in studies in nearby areas.
The above 2 & 3 are going to start soon.
Beside all these weekly meeting and weekly shakha is also going on.
Monday, May 20, 2013
Parbhudh Mahila Goshthi - Gurgaon Haryana
Parbhudh Mahila Goshthi - Gurgaon Haryana
प्रेस विज्ञप्ति (१७ /० ५ /२ ० १ ३ )
मर्यादा
और संस्कारो से सुशोभित नारी निभा सकती है राष्ट्र निर्माणमें अहम भूमिका -
भारती अरोड़ा गुडगाव - स्वामी विवेकनन्द सार्धशती आयोजन समिति की और से
"राष्ट्र निर्माणमें हमारी भूमिका" विषय पर प्रबुद्ध महिला गोष्ठी का आयोजन
किया गया जिसमे मुख्य अतिथि डीसीपी ट्रैफिक भारती अरोड़ा ने हिस्सा लिया।
मुख्य वकता प्रख्यात साहित्यकार मृदुला सिन्हा रही तथा अध्यक्षता डॉ.
चंद्रकांता ने की।
स्वामी
विवेकानंद सार्धशती आयोजन समिति गुरुग्राम की संवर्धिनी आयाम द्वारा
सेक्टर १ ४ स्थित राजकीय महाविद्यालयमें "राष्ट्र निर्माण में हमारी
भूमिका" विषय पर प्रबुद्ध महिला गोष्ठी का आयोजन किया गया । जिसमे गुडगाव
की विभिन्न क्षेत्रो से जुडी सेकड़ो प्रबुद्ध महिलाओ ने हिस्सा लिया ।
गोष्ठी में मुख्य अतिथि डीसीपी ट्रैफिक भारती अरोड़ा ने कहा कि मर्यादा और
संस्कारों से सुशोभित नारी एक सफल राष्ट्र के निर्मानमें अहम भूमिका नीभा
सकती है। वर्त्तमान में करोडो महिलाए राष्ट्र की प्रगति में पुरुषो के साथ
कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में अपना मुकाम ऊँचा किये हुये है। दामिनी
और गुडिया जैसे ज्वलंत प्रकरण पर कानून व्यवस्था को और कडा और तीखा बनाये
जानेकी जनता की मांग का समर्थन देते हुये उन्होंने कहा की इस दिशामे कड़े
क़ानून बनाकर इन घटनाओ पर रोक लगायी जा सकती है। भारती अरोड़ा ने महिलाओ और
छात्राओं से हर अन्याय और उत्पीडन के खिलाफ आवाज़ उठाने का आहवान करते हुये
कहा की अन्याय - उत्पीडन की इस लड़ाई में क़ानून व्यवस्था के साथ वह हर संभव
उनके साथ है।
मुख्य
वकता साहित्यकार मृदुला सिन्हा ने कहा कि नारी परिवार की धुरी है और
परिवार, समाज और देश की धुरी है।इस कारण देश के निर्माणमे नारी की
महत्वपूर्ण भूमिका बनती है। नारी घरमे हो या घर के बाहर, जहाँ भी है वह
डटकर अपने कर्त्तव्य और अधिकारों के लिए खड़ी है। अधक्षीय भाषण में डॉ.
चंद्रकांता ने कहा की भारतीय संस्कार देश की प्रत्येक समस्या का समाधान कर
सकते है और संस्कार जागरण का महत्वपूर्ण दायित्व नारी के कंधो पर ही है।
मचासिन विशिष्ट अतिथि डॉ. पदमेश बवेजा ने विवेकानंद सार्धशती आयोजन समिति
के संवर्धिनी आयाम की भूमिका पर प्रकाश डाला। दिल्ली से पधारी डॉ. नीशा
भार्गव ने कविता के माध्यम से नारी की भूमिका को चित्रित किया। विणा गोरई
ने अपने गीत के माध्यम से स्वामी विवेकानंद जी को भावांजलि प्रस्तुत की।
गोष्ठी
का मंच संचालन संवर्धिनी आयाम की जिला संयोजिका डॉ. नलिनी भार्गव ने किया।
गोष्ठी के इस सफल आयोजन में डॉ. नलिनी भार्गव, गार्गी कक्कड़, वीणा
अग्रवाल, वीणा गोरई, डॉ. इंदु बोकन, सुरेश शर्मा, सविता स्याल, डॉ. सविता
उपाध्याय, आभा कुलश्रेष्ठ, उषा महेता, परिणीता फुटेला तथा आयोजन समिति के
जिला संयोजक कैलाश गर्ग, प्रांतीय सदस्य - अजय सिंहल, सह संयोजक - ओकार सिह
पाल, मिडिया प्रभारी राजीव मित्तल तथा डॉ. अशोक दिवाकर एवं नरेन्द्र गौड़
सहित सेकड़ो प्रबुद्ध महिला एवं नागरिक उपस्थित थे।
राजीव मित्तल
जिला मिडिया प्रभारी
स्वामी विवेकानंद सर्धशाती आयोजन समिति
गुरुग्राम
मोबाईल : ९ ९ १ ० १ ६ ९ ७ ९ ०
Monday, May 6, 2013
Inauguration of Pradarshni
Inauguration of Pradarshini on Life of Samiji prepared by us has been
organised on 6 May 2013 t 6:30 PM in famous Sarasbag Ganapati Mandir in
Pune. Acharya Govinddevagiri Maharaj, Shri. Madhubhai Kulkarni, Shri.
Vasudev Kamat, Shri. Pramodji Kambale will be honorable guests. Attached
is invitaion card (in Marathi) for the programme.
Tuesday, April 9, 2013
TV Channel coverage of SuryaNamaskar
SuryaNamaskar Event on A2Z News
SuryaNamaskar Event on AajTak News
SuryaNamaskar Event on P7 News
SuryaNamaskar Event on TV9 News
SuryaNamaskar Event on Gujarat Headline
SuryaNamaskar Event on ABP News
SuryaNamaskar Event on Zee News
SuryaNamaskar Event on Sahara NCR
SuryaNamaskar Event on AajTak (Delhi) News
SuryaNamaskar Event on Zee News
SuryaNamaskar Event on Sahara Samay
SuryaNamaskar Event on India News
SuryaNamaskar Event on Zee News
Book Release
Bharatheeya Vichara Kendram, Trivendram brought out a book on Swami
Vivekananda authored by 101 prominent writers in Malayalam. Date:
13.3.2013
For Book (PDF) and other information, please Click Here
राष्ट्रीय समस्याओं का हल : स्वामी विवेकानन्द में
भारत को यदि जीवित रहना है और प्रगति करते हुए अपने
खोये हुए गौरव को प्राप्त करना है, तो अपनी राष्ट्रीय समस्याओं का हल उसे
स्वामी विवेकानन्द में ही ढूँढना होगा , क्योंकि स्वामी विवेकानंद जी ने
व्यक्तिगत, सामाजिक व राष्ट्रीय जीवन को प्रभावित करने वाले हर पहलू पर बड़े
ही तार्किक एवं व्यावहारिक विचार प्रस्तुत किये , जो आज भी उतने ही
प्रासंगिक हैं । और इस पुनीत कार्य को देश का युवा वर्ग आसानी से कर सकता
है । स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि " मुझे युवा पीढ़ी पर, आधुनिक पीढ़ी
पर विश्वास है , उन्हीं में से मेरे कार्यकर्ता निकलेंगे और सिंह के समान
वे सारी समस्याओं को सुलझा लेंगे ।" उक्त विचार समिति के हरियाणा प्रांत
संयोजक श्री अनिल कुमार ने आज के .सी . रोड पर स्थित जैन भवन में समिति
द्वारा आयोजित एक प्रेस वार्ता में व्यक्त किये ।
स्वामी विवेकानंद जी के 150वीं जयंती वर्ष के
उपलक्ष्य में पुरे वर्ष भर अनेक प्रकार के कार्यक्रम किये जाने हैं । इसी
कड़ी में आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि
मार्च और अप्रेल के महीने में युवा शक्ति के प्रेरणा पुंज रहे स्वामी जी
का सन्देश सभी छात्र-छात्राओं तक पहुँचाने के उद्देश्य से फरीदाबाद जिले
के सभी कालेजों व शैक्षणिक संस्थानों में 'SWAMI VIVEKANAND JI IN
CAMPUS ' नाम से स्वामी जी का चित्र अनावरण , भाषण प्रतियोगिता , निबन्ध-
लेखन , सांस्कृतिक कार्यक्रम , रक्त-दान शिविर, सामजिक विषयों से सम्बंधित
युअवाओन का रुझान जानने के लिए सर्वे आदि अनेक प्रकार के कार्यक्रम
आयोजित किये जायेंगे । जिसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं । सभी
कालेजों में कालेज प्रबंधन की सहमति से कार्यकर्ताओं की टोलियाँ बना दी
गयी हैं जिनमे कुछ समिति के कार्यकर्ता होंगे, कुछ उस कालेज या संस्थान के
विद्यार्थी तथा उसी कालेज/संस्थान के एक-दो अध्यापक शामिल किये गए हैं ।
जिले में 14 लोगों की एक स्वागत समिति बनाई गयी है , जिसमे डी ऐ वी कालेज
के प्रिंसिपल श्री सतीश आहूजा, के एल मेहता दयानंद शिक्षा समिति की चेयरमैन
श्रीमती विमला मेहता, अग्रवाल कालेज के प्रिंसिपल श्री के के गुप्ता, श्री
राम इंजीनियरिंग कालेज के निदेशक श्री नरेंदर गुप्ता, एडवांस्ड
इंजीनियरिंग कालेज के निदेशक श्री विनय गुप्ता आदि शामिल हैं ।
इस अवसर पर भगवान् महावीर इंटरनेशनल हॉस्पिटल के
चेयरमैन श्री अजित सिंह पटवा विशेष रूप से उपस्थित थे । श्री पटवा ने
कालेजों में किये जाने वाले इन कार्यक्रमों में हर संभव मदद देने का वादा
किया ।
समिति के युवा शक्ति आयाम के जिला संयोजक संदीप जी, समिति के सह-जिला
संयोजक बी आर सिंगला, श्री संजय अरोड़ा जी, पवन सिंह मलिक व समिति
के प्रचार प्रमुख राजेंद्र गोयल आदि भी प्रेस वार्ता में उपस्थित रहे ।
Ghar Ghar Swami Vivekananda
As part of Swami Vivekananda Sardh Shati Samaroh, there are so many
programs going on through out the country to spread out the thoughts of
Swami Vivekananda. In Madhya Pradesh, Jhoteshware, Message of Swami
Vivekananda is taken to 12 lacs homes by distributing the various
Sahitya relating Swami Vivekanandan.
Monday, April 8, 2013
हिमाचल प्रदेशमें सूर्य नमस्कार
हिमाचल प्रदेशमें 18 फरवरी को स्वामी विवेकानन्द की 150 जयन्ती पर
आयोजित सूर्य नमस्कार कार्यक्रम में पूरे प्रदेश में लगभग एक लाख छात्र -
छात्राओं ने भाग लिया स्वामी विवेकानन्द सार्ध शती समारोह समिति के
प्रान्त संयोजक डाक्टर सुरेश सोनी जी ने बताया कि प्रान्त के 23 जिलों में
1250 जगह पर सामूहिक सूर्य नमस्कार का कार्यक्रम आयोजित हुआ ।
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