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Thursday, April 4, 2013

पांच लाख से अधिक विद्यार्थी आज करेंगे सूर्य नमस्कार



18 Feb, फाजिल्का
स्वामी विवेकानंद जी 150वीं जयंती समारोह समिति की ओर से 18 फरवरी को देश भर में सूर्य नमस्कार का आयोजन किया जा रहा है। सुबह नौ बजे पंजाब में भी लाखों विद्यार्थी सूर्य नमस्कार करेंगे।
प्रांतीय समिति के सचिव चंद्रशेखर तलवाड़ व जिला संयोजक मास्टर रणबीर झोरड़ ने बताया कि पूरे पंजाब में एक ही समय में पांच लाख से अधिक विद्यार्थी सुबह नौ बजे तय सार्वजनिक स्थानों पर एकत्रित होकर सूर्य नमस्कार करेंगे। यह कार्यक्रम पूरे प्रदेश में आयोजित किया जा रहा है। हर जिला संयोजक जिले के आकार अनुरूप दो, तीन या उससे अधिक जगह पर कार्यक्रम आयोजित करवा रहे हैं।
समिति के प्रांतीय संयोजक संत बलवीर सिंह सीचेवाल कपूरथला में इस कार्यक्रम को संपन्न करवाएंगे, जबकि लुधियाना में चंद्रशेखर तलवार की देखरेख में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। फाजिल्का में मास्टर रणबीर झोरड़ की देखरेख में होने वाले कार्यक्रम में मुख्यातिथि वन एवं श्रम मंत्री सुरजीत ज्याणी होंगे। अध्यक्षता एसएसपी अमर सिंह चहल व एडीसी चरणदेव सिंह मान करेंगे।
इस तरह करवाए जाएंगे सूर्य नमस्कार
फाजिल्का : जिला संयोजक मास्टर रणवीर ने बताया कि स्वामी विवेकानंद जी देश की युवा शक्ति को जागृत करने के लिए प्रयासरत रहे हैं। सूर्य नमस्कार सात प्रकार के आसनों का लाभ देने वाला मानसिक, बौद्धिक, नैतिक व आध्यात्मिक व्यायाम है, जो युवाओं को उनकी शक्ति का अहसास करवाता है। प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करने वाले लंबी आयु, बुद्धि, बल, वीरता और तेज को प्राप्त करते हैं। हर आयोजन स्थल पर आसन करने वालों के बीच संख्या के अनुसार टेबल स्थापित किए जाएंगे, जिन पर इंस्ट्रक्टर आसान करेंगे और लोग उन्हें देखकर सूर्य नमस्कार करेंगे।

Wednesday, April 3, 2013

सूर्य नमस्कार से शरीर, मन एवं आत्मा पर पड़ता है सकारात्मक असर

17 Feb फिरोजपुर सोमवार को देश भर में करोड़ों लोग सूर्य नमस्कार करेंगे। अबोहर में भी ऐसा आयोजन हो रहा है। सूर्य नमस्कार न तो आसन है और न ही पारंपरिक योग का अंग, पर यह अत्याधिक लाभप्रद व उपयोगी है। इसे योगासन व प्राणायाम का मिश्रण कहें तो ज्यादा उपयुक्त होगा। इसे अलसुबह या सायं के समय सूर्य की ओर मुख कर किया जाता है। सूर्य को स्वास्थ्य एवं लंबी आयु देने वाला देवता कहा जाता है। सूर्य नमस्कार से मनुष्य के शरीर, मन एवं आत्मा पर सकारात्मक असर पड़ता है। यह शरीर को स्फूर्ति, जोड़ों का कसाव कम करने व आंतरिक अंगों की मालिश करता है, श्वसन एवं रक्त संचार प्रणाली को अधिक सक्रिय बनाता है। सूर्य नमस्कार 12 आसनों की प्रक्रिया है।
सूर्य नमस्कार का एतिहासिक व आध्यात्मिक महत्व
अनादि काल से सूर्य की आराधना व उपासना चली आ रही है। इसका विवरण वेदों व पुराणों में भी पाया जाता है। सूर्य उपासना के लिए अनेक सूर्य मंदिरों का निर्माण देश में किया गया है। इसके अलावा मिश्र के पिरामिड, मैक्सिको का युकतान, बेबीलोनिया व काल्डिया के जिक्कुरत आदि सूर्य उपासना के लिए ही निर्मित और समर्पित किए गए थे।
डा. पाल मदान, अबोहर।

ref : http://www.jagran.com/punjab/firozpur-10139586.html