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Friday, April 5, 2013

सामूहिक रूप से किया सूर्य नमस्कार

सामूहिक सूर्य नमस्कार में भाग लेंगे विद्यार्थी

9 Feb, जगाधरी : स्वामी विवेकानंद सार्ध शती समारोह समिति के पांचों आयामों के संयोजक की बैठक शनिवार को होनियान गली में संपन्न हुई।
जिला संयोजक रजनी प्रकाश वशिष्ठ ने बताया कि तेजस्वी योद्धा सन्यासी स्वामी विवेकानंद जी के जन्म की 150वीं जयंती के अवसर पर सभी विद्यार्थियों तक उपासना व स्वास्थ्य चेतना का संदेश पहुंच सके। इसी उद्देश्य को लेकर 18 फरवरी को सुबह जगाधरी के सभी स्कूलों के विद्यार्थी इस सामूहिक सूर्य नमस्कार में भाग लेंगे। इसी दिन महायज्ञ किया जाएगा। महायज्ञ में सभी विद्यार्थी आहुति डालेंगे। सभी स्कूलों की प्रबंधक समिति से बातचीत करने के लिए टीम बनाई गई है। टीम स्कूल प्रबंधक समिति से संपर्क करने में लगी है, ताकि विद्यार्थियों को इस बारे में जागरूक किया जा सके। टीम विद्यार्थियों को स्वामी जी के जीवन बारे में भी विस्तार से बता रही है। विद्यार्थियों को उनके आदर्श जीवन में अपनाने के लिए आहवान भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 37 स्थानों में सामूहिक सूर्य नमस्कार का आयोजन किया जाएगा। इसमे 30 हजार के करीब विद्यार्थी भाग लेकर सूर्य नमस्कार में भाग लेंगे। इस मौके पर मुलखराज, लक्ष्य बिंद्रा, कौशल कुमार, अमर सिंह, विपुल, शक्ति शरण, डॉ. आलोक गर्ग आदि मौजूद रहे ।

Thursday, April 4, 2013

18 को होगा सूर्य महा नमस्कार, विद्यार्थी लेंगे भाग

16 Feb, रादौर : स्वामी विवेकानंद सार्धशती समारोह के अवसर पर 18 फरवरी सोमवार को सुबह 9 बजे से 11 बजे तक एमएलएन कॉलेज में सूर्य नमस्कार महायज्ञ का आयोजन होगा।
कार्यक्रम के संयोजक घनश्यामदास मनचंदा ने बताया कि सूर्य नमस्कार महायज्ञ इस दिन पूरे भारत में एक साथ मनाया जाएगा। इस दौरान नौंवी से बारहवीं कक्षा तक के सभी छात्र-छात्राएं सामूहिक रूप से सूर्य नमस्कार करेगे। बीस मिनट के सूर्य नमस्कार कार्यक्रम में विद्यार्थियों को सात योगासनों का लाभ मिलेगा। सूर्य नमस्कार शिक्षा की दृष्टि से मन व बुद्धि को एकाग्र करने में सहायक सिद्ध होता है। व्यायाम के बिना मन को एकाग्रता व बुद्धि का संचार नहीं होता। सूर्य नमस्कार करने से विशेष सात आसनों का लाभ प्राप्त होता है। जो स्वास्थ्य के लिए विशेष लाभकारी होता है। स्वामी विवेकानंद जी का संदेश शक्तिशाली युवा, मजबूत राष्ट्र,युवा भारत की आन और शान मेरा भरोसा है।
उनका मानना था कि एक दिन भारत युवा शक्ति के बल पर विश्व का मार्गदर्शन करेगा। स्वामी विवेकानंद भारत को कमजोर वर्ग को देखकर तड़फ उठते थे। उनके मन में बहुत पीडा होती थी। वह हमेशा दरिद्र सेवा को नारायण सेवा मानते थे। उनका मानना था कि अपने को कभी कमजोर मत समझो। उठो, बढ़ो, सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी। इस अवसर पर मास्टर घनश्यामदास मंनचदा, किरणपाल, सुशील बकाना, दिनेश मान, संदीप सैनी रादौर, सोमनाथ अरोडा, अमित काम्बोज आदि उपस्थित थे।