Monday, October 22, 2012

भारत जागो ! विश्व जगाओ !! महाशिबिर - कन्याकुमारी

Wake up Bharat! Light Enlighten the world!! Mahashibir - Kanyakumari12 जनवरी 2013 से भारत के प्रेरणापुरुष स्वामी स्वामी विवेकानंद जयंती के सार्ध शती समारोह वर्ष का प्रारंभ हो रहा है। इस समारोह के पूर्वतयारी के लिए कन्याकुमारी के विवेकान्द केंद्र मुख्यालय - विवेकानंदपुरम में  भारत जागो ! विश्व जगाओ !! महाशिबिर का आयोजन हुआ। 

उत्तर भारत के २२ राज्य से 676 युवक युवती सहभागी।
शिबिर दायित्ववाली चमू - 230
शिबिर कालावधी - 12 अक्तूबर से 15 अक्तूबर

12 अक्तूबर 2012
 
उद्घाटन सत्र  -
मा। किशोरजी, सार्ध शती समारोह के अखिल भारतीय समन्वयक 

Wake up Bharat! Light Enlighten the world!! Mahashibir - Kanyakumariभारत जागो ! विश्व जगाओ !! इस महाशिबिर में स्वामीजी के विचारोंसे प्रेरित होकर हम निश्चित उद्देश से पधारे है। भारत विश्व का एक प्राचीन देश है। यह विश्व का सबसे युवा देश भी है। काफी बड़ा युवा धन इस देश को प्राप्त है। परन्तु देश की वर्तमान स्थितियां अस्वस्थ करती है। अतीत में इस देश ने अनेक संकटो का सामना किया। काफी समस्याओंसे देश संघर्षरत है। स्वतंत्रता के पश्चात् शिक्षा के माध्यम से जो सांस्कृतिक जुड़ाव होना चाहिए था, जो अखंडता व एकता प्रस्थापित होनी चाहिए थी वह नहीं हुआ। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे समय में इस देश को कठिन स्थितियोंसे बहार निकालकर फिरसे वैभवपूर्ण स्थानपर स्थापित करना आवश्यक है। जगद्गुरु भारत स्वामी विवेकनन्दजी का स्वप्न था। युवा पीढ़ीही इस स्वप्न को साकार करेगी ऐसा विश्वास उन्हें था। इसलिए युवओंके जागृती हेतु इस संकल्प महाशिबिर का कन्याकुमारी में आयोजन किया है। यह वह स्थान है जहाँ स्वामीजी को अपने जीवित कार्य का साक्षात्कार हुआ था।

स्वामी विवेकानंद के राष्ट्र जागरण करनेवाले विचार घर घर पहुँचाने के लिए एक बृहद योजना बनाई गयी है। इसके तहत देश के 4 लाख गांवों में संपर्क किया जायेगा। 4 करोड़ घरों तक संपर्क और करीब 1 लाख से अधिक स्थानों पर सामूहिक सूर्यनमस्कार, 3 लाख जगहों पर शोभा यात्रा आदि उपक्रमों का आयोजन होगा। 

मा। बालकृष्णनजी, अखिल भारतीय उपाध्यक्ष, विवेकानंद केंद्र 

Wake up Bharat! Light Enlighten the world!! Mahashibir - Kanyakumariदेवी पार्वती, स्वामी विवेकानंद और विवेकानंद केंद्र के निर्माता मा। एकनाथजीकी तपोभूमि कन्याकुमारी में आयोजित इस महाशिबिर में हम विभिन्न प्रान्तों से एकता की अभिव्यक्ति के लिए एकत्र आए है। अपने जीवन उद्देश को समझने के लिए आये है। उस उद्देश को कैसे पूर्ण करना है यह जानने के लिए आये है। इस संकल्प शिबिर का उद्देश है की सम्पूर्ण भारतीय युवा पीढ़ी में एक नवचेतना जागृत करना। इस दृष्टी से इस शिबिर का विशेष महत्व है। यह शिबिर याने अपने जीवन का एक टर्निंग पोईन्ट है। अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए व जीवन की दिशा सुनिश्चित करने के लिए निश्चित रूप से इस शिबिर का बड़ा योगदान होगा। सम्पूर्ण भारत परिभ्रमण करके स्वामी विवेकानंद कन्याकुमारी आये। कन्याकुमारी में उन्होंने माँ पार्वती के चरणों में प्रार्थना की और अपने जीवन के उद्देश का साक्षात्कार कर लिया। माँ का कार्य याने भारत माता का कार्य इस बात को उन्होंने समझ लिया। सम्पूर्ण विश्व को जगाने के लिए उन्होंने माँ पार्वती से शक्ति प्राप्त की। उन्हें माँ पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उसी प्रेरणा से सागर में स्थित श्रीपाद शिलापर 3 दिन और 3 रात्रि तक अखंड ध्यान किया। अपने ध्यान में उन्होंने अखंड भारत देखा। देश की स्थिति समझ ली। भारतवासीयोंके उद्धार के लिए एक व्यापक योजना बनाई। स्वामीजी कहते है, भारत के पतन का कारण भारत का असंगठित जीवन है। विश्व के अन्य लोगोंकी तुलना में हम अत्यंत हीन जीवन व्यतीत कर रहे है। हम आलसी बन गए है। हम घोर तामस से ग्रस्त है। व्यर्थ विवादोंमे उलझ गये  है। इसी बात का फायदा विदेशियों ने उठाया। उन्होंने हमें गुलाम बनाकर बुरी तरह लुटा।

Wake up Bharat! Light Enlighten the world!! Mahashibir - Kanyakumariऐसे निराशाजनक स्थिति से भारतीय समाज को अध्यात्मिक चेतना से स्वामीजी ने जागृत किया। विश्व सम्मेलन से सफल होकर लौटने के बाद स्वामीजीने तुरंत राष्ट्र को संगठित करना प्रारंभ किया। युवकों को एकत्र करने के लिए कोलम्बो से अल्मोरा तक युवा शक्ति को मार्गदर्शन किया। 1905 में बंगाल के विभाजन के विरुद्ध लढने के लिए कई युवकों ने स्वामीजी से प्रेरणा ली। लो। तिलक, सुभाष बोस, सरदार पटेल, राजेंद्र प्रसाद ऐसे जननायको ने स्वामीजी से प्रेरण ली।

इतिहास के इस बात को समझकर हमें नि:स्वार्थ भाव से देश के लिए काम करना होगा। समर्पित जीवन की प्रेरणा स्वामीजी के विचारोंसे लेनी होगी। आज देश के लिए युवा शक्ति की अत्यंत आवश्यकता है। इसलिए विवेकानंद केंद्र से जुड़कर हमें मनुष्य निर्माण व राष्ट्र निर्माण के लिए काम करना होगा। सेवाव्रती, शिक्षार्थी, जीवनव्रती के रूप में हमें समय दान देना होगा। यह समय की मांग है की विवेकानंद केंद्र से जुडो और अपना समय दो। हमें प्रत्येक घर में सनातन जीवन मूल्य पहुँचाना है। कार्यकर्ता निर्माण करना है। इसलिए भारतमाता की चरणों मे सम्पूर्ण समर्पण की तयारी रखिये। इस देश के माता पिताओंसे मेरा आवाहन है की, राष्ट्र निर्माण के पुण्य कार्य में अपने पुत्रों व पुत्रियों के मार्ग में बाधा न डालते हुए उन्हें समर्पण की प्रेरणा दे। क्यों की यही राष्ट्र कार्य का सही समय है। इस दृष्टी से ये संकल्प शिबिर एक निर्णायक शिबिर है।

13 अक्तूबर
मा। विश्वासजी : सार्ध शती समारोह, प्रबुद्ध भारत आयाम राष्ट्रिय प्रमुख 
विषय - स्वामीजी का राष्ट्रप्रेम और युवाओं को सन्देश

Wake up Bharat! Light Enlighten the world!! Mahashibir - Kanyakumariआज हमको भारत जागो विश्व जगाओ, ऐसा कहना पड रहा है, यह बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है। आज भी हम घोर तमस से बाहर नहीं आयें है। भारतीय युवाओं को जागृत करने के लिए उनमे चेतना उत्पन्न करने के लिए इस शिबिर का आयोजन किया है। काफी कष्टों से हम यहाँ पहुंचे है। ताकि  अपने जीवन की दिशा सुनिश्चित करे। स्वामीजी के विचारों से प्रेरणा  ग्रहण करे। केवल भारत में ही नहीं विश्व के अन्य देश तथा व्यक्तियों ने भी स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा ग्रहण की। जापान के प्रधान मंत्री भारत आये तो उन्होंने कहा हमने जो प्रगति की है उसके पीछे स्वामी विवेकानंद की ही प्रेरणा है। कारण जापान के द्रष्टा महापुरुष तेनसिन ओकेकुरा ने स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा ली थी।

स्वामी विवेकानंद ने भारत परिभ्रमण के दौरान धर्म की अवनति, टूटते जीवनमूल्य, गरीबी, निर्धनता, अज्ञान आदि बातें देखि। दूसरी ओर उन्होंने देखा की इन स्थितियों में भी भारत की धार्मिक और आध्यात्मिक धरोहर सशक्त है। सांस्कृतिक भावधारा अक्षुण्ण है। विश्व को परिवार समजने की भावना काफी प्रबल है। सम्पूर्ण विश्व में एकात्मता की भावना को जन्म देनेवाली यह संस्कृति महानतम है। इसी महानतम संस्कृति ने सदियों से विश्व को त्याग और सेवा का अमर सन्देश दिया। 11 सितम्बर 1893 के बाद स्वामी विवेकानंद अमरीका में  गणमान्य व्यक्ति बन गए। अमरिका में उन्होंने वैभव सम्पन्नता को देखा। सुख सुविधा होते हुए भी अपने देशवासियोंके स्मरणमात्र से वे रातभर रोते रहे। राष्ट्रप्रेम के कारण ही उन्होंने भारत में आकर युवकों का संघटन बनाया। युवको को प्रेरणा दी। आज हम सभी इस शिबिर से यह सन्देश लेकर जाएँ की हमें सेवा के माध्यम से ही अपने जीवन तथा कार्य को आगे बढ़ाना है।

मा। निवेदिता दीदी  : राष्ट्रिय उपाध्यक्ष, विवेकानंद केंद्र  
विषय - भारत जागो विश्व जगाओ

भारत जागो विश्व जगाओ, यह स्वामी विवेकानंद का अमर सन्देश है। यह सन्देश याने उनके कार्य का निचोड़ है। आज भारत सोया हुआ है। तामस से पीड़ित है। जो विश्व को जगा सकता है, वही सो रहा है। इसलिए हमें स्वामी विवेकानन्द के विचारों को अच्छी तरह आत्मसात करना होगा। भोगवाद को नष्ट करने का तत्त्वज्ञान विश्व में आज केवल भारत के पास ही है। हमारा देश आज भी जीवित है क्यों की हमारे पूर्वजों ने हमारे समाज की व्यवस्था अद्वैत तत्वज्ञान पर खडी की है। आज हमें यह समझाना होगा की हमारे संस्कृति में ऐसा क्या है की जिसका हम त्याग कभी भी न करे और ऐसा क्या है की जिसमे हम समय के साथ परिवर्तन कर सकते है। यह सब छोड़कर आज प्रत्येक व्यक्ति 'क्रायींग बेबीज' बन गए है। जब तक हम निर्दोष नहीं होंगे तब तक हमारे प्रगति का मार्ग प्रशस्त नहीं होगा। इसलिए स्वामीजी कहते है, मुझे ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो अपने समाज पर प्रेम करे और अपने ह्रदय को विशाल तथा व्यापक बनाये। समाज की समस्त समस्याओं को समझते हुए अपना समय दान देगा। हमारे पूर्वजों ने अनेक आक्रमणों और कष्टों को सहकर इस पवित्र आध्यात्मिक संस्कृति का जतन किया। हमारे मन में अपने पवित्र संस्कृति के प्रति सन्मान और स्वाभिमान जागृत करे। इसलिए आओ, हम अपने धरोहर को समझते हुए स्वयं जगकर विश्व को जगाएं।

14 अक्तूबर
मा। बालकृष्णनजी : राष्ट्रिय उपाध्यक्ष, विवेकानंद केंद्र  
विषय - सार्ध शती समारोह और पांच आयाम

आज भारत अनेक गुप्त आक्रमणों का सामना कर रहा है। इस अवस्था में सभी स्थरो पर देश वासियों की नैतिकता गिरती जा रही है। आज हमें इन स्थितियों से उभरने के लिए अपने अंतर आत्मा को जागृत करते हुए सम्पूर्ण देश में भव्य दिव्य रूप में सार्ध शती समारोह के उपक्रमों को ले जाना है। इसलिए स्वार्थ त्याग कर राष्ट्र का पुनर्निमाण हमें करना है। इस हेतु गांव गांव, शहर शहर पहुँचाने के लिए पांच आयामों के माध्यम से हम कार्य करेंगे। देश के युवाओं को सही दिशा देने के लिए युवा शक्ति आयाम के माध्यम से हमें काम करना है। अग्रेंजों को देश से निकलने के लिए इस देश में यदि क्रांतिकारियों का निर्माण हो सकता है तो देश के नकारात्मकता व दुर्बलता को दूर करने के लिए निस्वार्थी युवा कार्यकर्ता क्यों नहीं। हम जियेंगे तो भारत के लिए, मरेंगे तो भारत के लिए। यह देश मात्रुसंस्कृति से संपन्न देश है। इस देश के उत्थान में स्त्रियों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसलिए सभी स्त्रियाँ संवर्धिनी के माध्यम से मिलजुलकर काम करे। भारत में आज प्रबुद्ध वर्ग निर्णायक शक्ति के रूप में दिखाई दे रहा है। उसे सही दिशा देना आवश्यक है। उनके साथ बैठकर सामाजिक तथा राष्ट्रिय समस्याओ के उपायों पर चर्चा हो, इसलिए प्रबुद्ध भारत आयाम के माध्यम से हमें काम करना है। गाँव की ओर चलो, यह संदेश हमारे महापुरुषों ने दिया है। स्वामीजी कहते थे भारत गांव में बसता है। गांव की विशेषताओं को समझते हुए हमें ग्रामायण के माध्यम से गाँव गाँव पहुँचना है। भारत में करीब 10 करोड़ से भी अधिक पिछड़ी जनजाति के लोग रहतें है। इन जातियों में धर्मान्तरण की बहोत बड़ी समस्या है। अब तक इन जातियों में पचास प्रतिशत धर्मान्तरण होने का अनुमान है। यदि समय रहते इन लोगों की पहचान व चेतना को जगाया नहीं गया तो यह समस्या और भयावह बन सकती है। इसलिए अस्मिता आयाम के माध्यम से हमें इस क्षेत्र में काम करना होगा। 

मीरा दीदी  : प्रान्त संगठक, असम  
विषय - कार्य की चतु:सूत्री

सांस्कृतिक व आध्यात्मिक सम्पन्नता यह भारत की प्रमुख विशेषता है। धर्म तथा आध्यात्म के माध्यम से भारत ने विश्व को कामधेनु जैसी एक आदर्श समाज व्यवस्था दी। जिसमे हमारे ऋषी मुनियों का समर्पण है। मानवता का सन्देश कूट कूट कर भरा है। हर क्षेत्र में भारत ने स्थाई रचना दी, जिस आधार पर विश्व आज भी भारत की ओर ताक रहा है। ये सारी व्यवस्थाए एक दिन में नहीं बनी।

काल के प्रवाह में स्वार्थ के कारण इन व्यवस्था ओं की ओर दुर्लक्ष हो गया। स्वामीजी बताते है की, इस नौका ने हजारों सालों तक मानवता को पार किया। आज उसमे कुछ छेद हुए है। इस छेड़ को हम सबको मिलकर मिटाना होगा।

इसलिए हमें सार्वभौमिक, सर्वस्पर्शी, स्थायी एवं वर्तमान का लक्ष्य निर्धारण करने वाली और निश्चित यश देनेवाली योजना बनाकर कार्य करना होगा। यही हमारे कार्य की चतु:सूत्री होगी।

रुपेश भैय्या : प्रान्त संगठक, अरुणाचल प्रदेश
विषय - परिणामकारी कार्यकर्ता

विनाप्रशिक्षण कार्य से परिणामकारी कार्य नहीं होगा। अपेक्षित कार्य होना है तो प्रशिक्षण तो होगा ही। प्रशिक्षण यह निरंतर चलनेवाली प्रक्रिया है। ध्येय की स्पष्टता भी आवश्यक है। ध्येय स्पष्ट होने से उसके अनुरूप आचरण होने लगता है।  नेताजी सुभाष चन्द्र आय सी एस उत्तीर्ण हुए परन्तु उनका ध्येय निश्चित था, स्वातंत्र्यवीर सावरकरजी बारिस्टर हुए, लो. तिलक को गणित विषय में विशेष रूचि थी, फिर भी समय की आवश्यकता को समझते हुए इन युवाओं ने अपने जीवन का मार्ग निश्चित किया।

पुराने कार्यकर्ता के व्यवहार से नए कार्यकर्ता सीख जाते है, इसका हमें ध्यान रखना पड़ेगा। एकत्र कार्य करते समय कभी भी इर्षा, राग, द्वेष, अहम् बढ़ सकते है, उन पर विजय पाना आवश्यक होता है। एक प्रकार से कार्यकर्ता को सदाचरणतत्पर रहने की आवश्यकता होती है। कार्य करते समय अपने क्षमताओं का विकास होना है। अनुभव से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। अपने अन्दर के अमृत तत्त्व का प्रकटीकरण करने के लिए हम कार्य करते है, इस धारणा को ध्यान में रखना है।   

निवेदिता दीदी  : राष्ट्रिय उपाध्यक्ष, विवेकानंद केंद्र   
समापन सत्र

ऐसा क्या है की जो सदैव रहनेवाला है ?, शाश्वत आनंद कुछ है ? मेरे जीवन का क्या प्रयोजन है इस प्रकार के प्रश्न मन में आने लगते है तो सही अर्थ में मनुष्य जीवन की शुरुआत होती है। इन प्रश्नों ने ही हमें यहाँ लाया है। ऋषियों ने अंतर्मन की खोज करते हुए इन प्रश्नों का जवाब पाया। मै चिरंतन आत्मा हूँ, केवल शरीर नहीं - इसकी अनुभूति करना ही जीवन का ध्येय है। एक जन्म में प्राप्त होनेवाली यह बात नहीं, इसलिए इस जन्म में हमें उस दिशा में प्रवास शुरू करना है। जीवन का अंतिम लक्ष्य प्राप्त करना है तो इधर उधर भटकते नहीं। जीवन का ध्येय राष्ट्र के ध्येय की विपरीत नहीं हो सकता। इस राष्ट्र का ध्येय सारे विश्व को आध्यात्म में मार्गदर्शन करना है। उच्च विचारों के संपर्क में रहते हुए ही हम उच्च ध्येय की ओर जा सकते है। ये व्यक्तिगत कार्य नहीं, संगठित करने का कार्य है। स्वामी विवेकानंद ने संगठन की आवश्यकता बताई। इसलिए हमें सामूहिक रूप से नियोजन करके कार्य करना है। यह सृष्टि समर्पण से निर्मित है। हम कितना जादा समय राष्ट्र के लिए देंगे इसका विचार हमें करना होगा। सार्ध शती समारोह हमारे लिए अवसर है। स्वामी विवेकानंद के वेदांत विचार, आत्मा के अमरत्व के विचार लोगों तक पहुँचाने के लिए अधिक उर्जा लगाने की  आवश्यकता है। यह कार्य हम सबको करना है। भगवान सधानों को चुनता है। हमें साधन, उपकरण बनाना है।

Saturday, September 29, 2012

"विवेक सन्देश" - पोलीटेकनिक महाविद्यालय, हरदा

Vivek Sandesh polytechnic college, Hardaविवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी शाखा हरदा द्वारा दिनांक २१/०९/२०१२ को स्थानीय शासकीय पोलीटेकनिक महाविद्यालय, हरदा में ‘‘विवेक संदेश’’ कार्यक्रम आयोजित किया गया । कार्यक्रम में स्वामी विवेकानन्द  के जीवन कि रोचक घटनाओं पर आधारित चित्र प्रदर्षनी लगाई, जिसमें महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने स्वामी विवेकानन्द जी के जीवन कि विभिन्न घटनाओं से जूडी चित्र प्रदर्षनी पर हर्ष जताया व सभी ने विवेकानन्द केन्द्र द्वारा आयोजित इस चित्र प्रदर्षनी व पुस्तक मेले के महाविद्यालय में आयोजन पर केन्द्र कि सराहना भी कि, पुस्तक मेले में स्वामी विवेकानन्द के विभिन्न साहित्यों के लगभग 100 प्रकार की  पुस्तकों व नावेल्टीस का प्रदर्षन किया गया,  साथ ही महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं व षिक्षकों ने पोस्टकार्ड पर स्वामी विवेकानन्द जी के उध्धरण लिखकर 200 पोस्टकार्ड अपने परिचितो व रिष्तेदारो के पते पर पोस्ट भी किये ।
कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य श्री व्ही. के. तिवारी, विवेकानन्द केन्द्र के नगर व्यवस्था प्रमुख श्री सुनील जी बागरे, श्री घनष्यामदास जी सोमानी, श्री कमल बागड़, ने भारत माता के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर किया। साथ ही चित्र प्रर्दषनी का अवलोकन कर अपने परिचितो को स्वामी जी के उध्धरण वाले पोस्ट कार्ड भी लिखे व केन्द्र द्वारा आयोजित किये गये विवेक संदेश कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहां की इस तरह के कार्यक्रम महाविद्यालय के युवाओं में एक सकारात्मक जागृति पैदा करते है इसलिए ऐसे कार्यक्रमों का नियमित आयोजन होते रहना चाहिए।
Vivek Sandesh polytechnic college, Hardaजैसा कि आपको विदित है विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी द्वारा वर्ष २०१३ में स्वामी विवेकानन्द  के १५० जन्म वर्ष होने के उपलक्ष्य में संपूर्ण देश, प्रांत व नगर में  "भारत जागो विश्व जगाओ" सार्ध शती समारोह का आयोजन धूमधाम से किया जाना है, पूर्व माह जनवरी में दिनांक २१ को केन्द्र द्वारा स्थानीय नेहरू स्टेडियम पर ५००० से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा सूर्य नमस्कार महायज्ञ में सहभागी होते हुए ६५,००० से अधिक आहुतियाँ दी थी, इसी कडी में हरदा जिले में भी तैयारी चल रही है और वर्तमान में ‘‘विश्व बंधुत्व दिवस’’ के उपलक्ष्य में हरदा जिले के समस्त महाविद्यालयों में इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना है । जिसमें स्वामी जी के जीवन से जुडी चित्र प्रदर्षनी, साहित्य प्रदर्षनी, व अन्य महाविद्यालयीन प्रतियोगिताएँ आयोजित कि जाऐगी ।
इसी क्रम में सितम्बर के अंत तक हरदा आर्दष कालेज में भी विवेक संदेश का अयोजन किया जायेगा। आज के इस विवेक संदेष कार्यक्रम में महाविद्यालयीन स्टाफ, पत्रकार बंधु, नागरिक गण, केन्द्र कार्यकर्ता रवि अग्रवाल, अमित पुरोहित, हेमंत मोराने, निलेष, सुदिप, डाली माहेषवरी, मोनाली ऐषकर, प्रियका यादव, व छात्र-छात्राएँ बडी संख्या में उपस्थित हुए । 

दोन युवा राष्ट्र निर्माते राजे शिव छत्रपती व स्वामी विवेकानन्द

Universal brotherhood Day Program at Nashikविश्व बन्धुत्व दिन के उपलक्ष्य में विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी शाखा नाशिक द्वारा युवाओं के लिये राष्ट्रीय कीर्तनकार श्री चारुदत्त आफळेजी की कार्यशाला का आयोजन किया गया। शनिवार दि.15 सप्टेंबर को शंकराचार्य संकुल मे तीन सत्रों में मा. आफळेबुवाने ‘दोन युवा राष्ट्र निर्माते राजे शिव छत्रपती व स्वामी विवेकानन्द’‘ इस विषयपर मार्गदर्शन किया। साधना के साथ साथ सामर्थ्यवान होना भी आवश्यक है ऐसे छत्रपती शिवराय और स्वामी विवेकानन्द दोनो ने बताया है। माता के संस्कारों से ही दोनोका जीवन उज्वल बना। शिवराय को जिजामाता ने और स्वामी विवेकानन्दजी को भुवनेश्वरी देवीने सुसंस्कारित किया था। दोनोने अपने जीवन में बहत संघर्ष किया। राष्ट्र के लिए समर्पण भावना से योगदान दिया। संस्कार ही भारतीय संस्कृती का मेरुदण्ड है। प्रखर देशभक्ती के कारण ही दोनो ने भारत माता का गौरव बढाया। दोनोका चरित्र अगली कई पीढियोंको मार्गदर्शन करेगा। कार्यशाला को विविध महाविद्यालयों से 500 युवक-युवती उपस्थित थे।

Universal brotherhood Day Program at Nashikदिन भर की कार्यशाला का प्रारंभ तीन ओमकार एवं प्रार्थना से हुआ। महाराष्ट्र प्रांत संघटक मा. विश्वासजी लपालकर ने ‘भारतमाता ध्यान’ का अभिनव उपक्रम लिया। संपूर्ण भारतमाता का, वैषिष्ट्यों सहित परिचय करवाया,आजकी दिक् भ्रमित अवस्था की जानकारी दी। आखिर में इस अवस्था से निकल कर पुनः जगत्‍गुरू पदपर आरुढ करने के लिए अपने पूरे सामर्थ्य के साथ राष्ट्रकार्य में सामिल होने का आहवान किया। प्रास्ताविक केंद्र परिचय अभिषेक कासोदेने दिया।  अतिथी परिचय दिग्विजय मगरने दिया, सूत्र संचलन निनाद पाठक ने किया। कार्यक्रम में मंचपर विवेकानन्द केन्द्र महाराष्ट्र प्रान्त संगठक श्री विश्वासजी लपालकर, नाशिक नगर संचालक श्री श्रीकृष्ण विद्वांस, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघके  पदाधिकारी श्री जयंत रानडे उपस्थित थे।  वंदे मातरम से  कार्यशाला का समापन हुआ।

Friday, September 28, 2012

महिला पोलिटेक्निक और संस्कृत महाविद्यालय मे विवेक संदेश, इन्दौर

Vivek Sandesh karyakarmaविवेकानन्द केन्द्र इन्दोर शाखा द्वारा महिला पोलिटेक्निक और संस्कृत महाविद्यालय मे विवेक संदेश कार्यक्रम का आयोजन किया गया | आने वाला वर्ष पुरे भारत के लिये महत्वपूर्ण रहेगा. स्वामी विवेकानन्द की १५० वा जन्म दिवस जो सार्ध शती समारोह वर्ष के रूपमें पूरे भारतमें मनाया जायेंगा। इसके पूर्व तयारी हेतु  विवेकानन्द के विचार सभी युवा तक पहुंचे इस दृष्टि से विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की इन्दौर शाखा की और से महाविद्यालयों में विवेक सन्देश का कर्यक्रम आयोजित किया गया । जिस मे स्वामी विवेकानन्द के जीवन पर आधारित चित्र प्रदर्शनी, स्वामी विवेकानन्द का साहित्य, युवाओं तथा शिक्षकों के लिये उपलब्ध कराया गया। महिला पोलिटेक्निक और संस्कृत महाविद्यालयों  मे दिनांक १५ सितम्बर २०१२ को इस कार्यक्रम में ४०० से अधिक छात्र-छात्राओ तथा शिक्षकों ने भाग लिया और विवेकानन्द के जीवन को समझा।

Sunday, September 23, 2012

Universal Brotherhood Day celebration at VKV Kanyakumari

Universal Brotherhood Day celebration at VKV KanyakumariVivekananda Kendra Vidyalaya, Kanyakumari celebrated 42nd anniversary of the dedication of Vivekananda Rock Memorial and Universal Brotherhood day celebration. On the first parliament of religions at Chicago , Swami Vivekananda addressed the audience as “Sisters and Brothers of America” which had an electrifying effect on them. His message to the people was to help others and not to fight, assimilation and not destruction to have harmony and peace and not dessension for the first time to westers audience, the message of Universal brotherhood and its proper understanding was given by Swami Vivekananda.
To commemorate the world famous speech given by Swami Vivekananda on 11th Sep 1893, Eknathji the founder of Vivekananda Kendra wanted this day to be celebrated as Universal Brotherhood day.

The program was inaugurated with traditional auspicious lamp lightening by our honourable chief guest. Mr. Kathirvel, Principal of Sun College engineering and technology Erachakulam followed by other dignitaries on the dices. Vivekananda Kendra Vidyalaya Students paid tribute to mother Bharat through the song Vande Matharam.

Shri. S.Abraham Lingom, Principal of Vivekananda Kendra Vidyalaya, Kanyakumari delivered the address that was like the colourful rainbow adorns the sky on a rainy.
Universal Brotherhood Day celebration at VKV KanyakumariThe Employees who have completed their ten and twenty years of service in Vivekananda Kendra were honoured. Ma. Balakrishnanji, Vice President, VRM & VK, in his Presidential address told about the importance of 150th Anniversary of Swami  Vivekananda and to celebrate it in a grand manner. He also told about, this celebration must reach is each and every person. Chief guest Mr. Kathirvel , Principal of Sun College of Engineering and Technology gives a sweetful speech about the golden thoughts of Swami Vivekananda. He told the younger generation to “Araise ! and Awake !! to achieve their goal."

The speciality of our motherland was known through Hindi Song by the students of 9th std. of VKV, Kanyakumari.
The Book was released by the name of “Swami Vivekananda in London” it was released by Ma. Bhanudhasji, General Secretary, VRM and VK and the first copy was given to the Chief guest.
The ceremony concluded with the cultural program performed by Vidyalaya Students.

Friday, September 21, 2012

विश्व बंधुत्व दिन कार्यक्रम : नाशिक

Universal brotherhood Day Program at Nasikविश्वबंधुत्व दिना निमित्त विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा नाशिक तर्फे नानाराव ढोबळे सभागृह,शंकराचार्य संकुल येथे श्री.शशिकांत मांडके, पुणे यांच्या व्याख्यानाचा कार्यक्रम  9 सप्टैंबर 2012, आयोजित केला होता. विश्वबंधुत्वाची भावना आपल्या भारतीय संस्कृती मध्ये पुरातन काळापासुन रुजलेली आहे. चराचरात परमेश्वराचे अस्तित्व आहे. फक्त आपलाच धर्म नाही तर सर्वच धर्म श्रेष्ठ आहेत. फक्त आपलीच उपासना पध्द्ती योग्य अन्य उपासना पद्ध्तींना अस्तित्वात असण्याचा अधिकारच नाही अशा प्रकारचे एकांगी तत्वज्ञान आपण शिकवत नाही. तर सर्वांना बरोबर घेऊन आपण आपली ऐहिक प्रगती करतो.असे विचार माननीय श्री.शशिकांत मांडके यांनी मांडले. चित्तरंजन देव लिखित “दीपस्तंभ नेतृत्वाचा” व डॉ.अशोक मोडक लिखित “स्वामी विवेकानंदांचे विचार आणि सद्यस्थिती” Universal brotherhood Day Program at Nasikह्या दोन पुस्तकांचे प्रकाशन मा. शशिकांत मांडके यांच्या हस्ते झाले. कार्यक्रमाला 75 श्रोते उपस्थित होते. श्री.शशिकांत मांडके यांचा सत्कार नाशिक नगर संचालक श्री श्रीकृष्ण विद्वांस यांनी केला.कार्यक्रमाचे सूत्रसंचालन निनाद पाठक याने,गीत रामवाडी संस्कार वर्गातील मुलामुलींनी,प्रास्ताविक अभिषेक कासोदे, व्याख्यात्यांचा परिचय दिग्विजय मगर यांनी केले. कार्यक्रमाची सांगता कु.छायामणि फुकन यांच्या वंदेमातरम ने झाली. धन्यवाद छायामणी नगर संगठक विवेकानंद केंद्र, शाखा नाशिक 

Universal Brotherhood Days Celebration at Mysore

Universal Brotherhood Days Celebration at MysoreInter school Cultural Competition was organized on 8th September at Vivekananda Kendra, Mysore Branch. 202 students from 14 schools participate in different events like Patriotic song, Essay writing on topic My Hero Swami Vivekananda, speech on Chicago speech and drawing – topic swami Vivekananda. Smt. Sreemati inaugurated the function.

Inter college Cultural Competition was organized onn 9th September, at Vivekananda Kendra, Mysore Branch. 124 students from 12 colleges participated in Patriotic song, essay on topic “vision 2020“, speech on “Punya Bhoomi Bharat”, Drawing on Swamiji.

Universal Brotherhood Days Celebration at MysoreLater on 9th September, public function held at Vivekananda Kendra, Mysore Branch. Sri C V Gopinath Ji, Retd. Additional Secretary, Govt of India was the Chief Guest. Smt Nagaratnamma presides the function. Sri Gopinath ji spoke on application of Swamiji’s message in present world and Wake up Bharat and enlightened the world.  172 people attended the function.

On 11th September, public function held at Gopal swamy college. Dr. A S Chadrashekar, Nagar Pramukh, Vivekananda Kendra Mysore presides the celebration. Sri Pradhumna Ji, Sangha Chalak, was the Chief Guest. 78 youths attended the function. Dr. Chandrashekarji spoke on 150th birth celebration of Swami Vivekananda and he invited people to spend their some times in this national cause. Sri Aravinda Prasad briefed the Kendra activities.  Sri Pradhumanaji  inaugurated the “ YUVA BHARATA” activities and spoke on that segment.